उत्सवे उत्सवके संगम जनकपुरधाम साहित्य-कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव

उत्सवे उत्सवके संगम जनकपुरधाम साहित्य-कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव – कुमार भास्कर

माघ १८ सँ ५ दिन धरि चलल जनकपुरधाम साहित्य–कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य उत्सव बहुते कारण सँ बिशिष्ट रहल । झाँकी उत्सव, राजनैतिक उद्घाटन उत्सव, वैचारिक विमर्श सहितक सत्रक उत्सव, अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य उत्सव, सांस्कृतिक उत्सव, मिथिला भोजोत्सव, मिथिला पेन्टिङ कार्यशाला सहित प्रदर्शनी उत्सव । एतेक सब सम्मिलित कैटेगरी समाहित भेने ने अस्सल महोत्सव, सेहे जनकपुरधाम साहित्यक–कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य उत्सव ।

उत्सवे उत्सवके सङोरल महोत्सव उद्घाटनसँ पहिने नगर मे विशाल झाँकी उत्सव जाहिमे पैराणिक, परम्परागत आ आधुनिक जीवनशैली दर्शनके विशिष्टता सहितक मनगर उपस्थिती रहल । साँसद, पूर्व मन्त्रिसहितक झाँकी यात्रामे जाइतसभक अपन अपन व्याप्तिसहित प्रदर्शन, सांस्कृतिक संस्थासभक झाँकी होइ या कलेज–स्कूली बैआसभक अपन कला–संस्कृति प्रतिक आदरभाव सहित सम्मिलित प्रदर्शन इ झाँकी उत्सवके अपने उत्कृष्टता देलक ।

उद्घाटन सत्र समावेशी नमूना राजनैतिक उपस्थिती
कोनो कार्यक्रममे एक–दू दलीय समर्थित रहल करैछ । लेकिन इ महोत्सव एकेले एहन महोत्सव रहल जाहिमे नेपालक अधिकांस आ सबस बेसी दलगत रजनैतीबला सभक सङोर एके मंच पर बैसा सकबाक बुत्ता देखौलक । हमर बाबुके शब्दमे कहल जाए त ‘सब दल जाँघमे जाँघ जोडने एके पाँतिमे बैसल’ आ सब मैथिलीप्रति प्रतिबद्धता देखौलनि से बर्षो सँ तोपाए लागल मैथिली विषयके सर्वस्विकारोक्ति देलनि ।


वैचारिक सत्रसभक महाकुम्भ
५ दिनमा महोत्सवमे २०टा वैचारिक विमर्शक सत्रसभ रहल जाहिमे साहित्य–कला, नाट्य, राजनिती, समयसामयिक सहितक सभ तरहे सत्रसभमे सभ वर्गक व्यक्तित्व सभक जोडगर उपस्थिती रहलासँ इ सत्रगत वैचारिक गोष्ठी÷विमर्शके अलगे स्थान दैत अधिकारिक व्यक्तित्व सभके अपन अपन क्षेत्रगत प्रतिबद्धता द एकरा उँचाइ पर पहुँचएलक से एकर उच्चतम प्रतिफल रहल ।


अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य उत्सव
अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य उत्सव अपनेमे अलगे उत्सव होएत अछि, तेकरो एहि महोत्सवमे सँगे स्थान द प्रतिदिन दू–दू नाटक मंचन भेनाइ अपना आपमे एहि महोत्सवके महमहा देलक । नेपालक ३टा नाटक अ भारतक ४टा नाटक मंचन आ नाट्यविधा पर सत्रविमर्श सहित जनकपुरधामक दर्शकलोकनिमे विभिन्न तरहक नाट्य मंचन देखि–देखी नाट्यप्रति रूची बढौनाइ एहि नाट्योत्सवके सफल प्रतिफल रहल ।

सांस्कृतिक उत्सव
कोनो उत्सवमे एक–दू साँस्कृतिक प्रस्तुती ओ उत्सवके मठोमाठ रहैछ लेकिन इ महोत्सवमे प्रत्येक साँझ कमसँ कम तिन–चारि उत्कृष्ट ख्यातिप्राप्त कलाकार लोकनिक उत्कृष्ट प्रस्तुतिमे जुआएल रातियोमे जूटल दर्शकसभके सभ दिन झुमौने रहल । भारतक प्रसिद्घ कलाकार सभमे डा. रञ्जना झा, प्रिया मल्लिक, पुनम मिश्रा, जुलि झा, प्रिया राज लगायतके दर्जनो कलाकार सभक सँगे नेपालक एक सँ एक नामी मैथिली कलाकारसभ ललित कामत, रविराज साह, संगिता देव, नविन मिश्र, स्मृति मिश्रा, सुभाष विरपुरिया, हरिशंकर मिश्र, रामनारायण ठाकुर, प्रियंका झा, रविन्द्र झा, संतोष एक्ट लगायतक बहुतो कलाकार सभक एकसँ एक प्रस्तुति रहल ।


मिथिला पेन्टिङ कार्यशाला
मिथिला मैथिलीक पैरानीककाले सँ चित्रक माध्यसँ जनजीवनके उकेरैत अएल मिथिला चित्रकलाके सेहो जनकपुरधाम साहित्य–कला तथा नाट्य महोत्सव मिथिला चित्रकलामे फ्यूजन सहितक विभिन्न मिडियममे कार्यशाला जनकपुर दर्शन क’ देशक राजधानी काठमांडूसँ अएल सहितक चित्रकारसभके एक सँ एक चित्रसभ उतारलनि जकरा महोत्सवमे प्रदर्शनी मे राखल गेल ।

मैथिली विकास कोषद्वारा अयोजित ओ महोत्सव मे ५ दिन मिथिला व्यन्जनक परिकारक खुअओल गेल त ओ अवधी भरि विभिन्न स्टलसभ पहिनूके दिनसँ लागल रहल जाहिमे, मिथिला चित्रकला, मिथिला बस्तुजात, विभिन्न जाइतसमूहक शिल्पवस्तु सभ सहित, अजुका समयमे उपयोग होएबला बिभिन्न बस्तुसभके मैथिलीक माध्यम सँ रंगाएल आ थिम्ड स्टल सभक मुख्य अकर्षन रहल । मैथिली विकास कोष सँगे इ महोत्सवके मैथिलीप्रति किछ बरिषसँ उदास देखल गेल सरकारक निकायमेसँ उद्योग, पर्यटन मन्त्रालय सह अयोजक मात्र नहि भ’ मन्त्रालयक मन्त्रीजी स्वम प्रत्येक दिन सहभागी भेलासँ हुनक कार्यकालमे मैथिलीप्रति सचेष्ट रहल प्रमाण देलनि । जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका सह अयोजक भ ओतबे तत्परता मात्र नहि देखएलक बल्कि मैथिलीमे पाठ्यक्रम तयार करबालेल तत्काल जुटि गेलनि से छुट्टे उपलब्धि रहल ।


एहि आयोजकीय महोत्सवमे एतेक महिना पहिनहिसँ तयारी करैत व्यवस्थापकीय टिममे किछू व्यक्तित्वसभसँगे अपने लागि भिडक’ जूटल मैथिली विकास कोषक अध्यक्ष जीवनाथ चैधरीजीके जते धन्यवाद देल जाए अ कम्मे होएत । सहयोगीके कमि रहल अवस्था होए या बजेटीय सहयोगके देरि÷कमी के कोनो तरहे उभर नहि दैत अपने बुत्ता प जे एहि विशाल अयोजनके सफल कएलनि तकर भिष्मपितामह जीवनाथ चैधरीके श्रेय देवामे कोनो सँकोच नहि । इ हिनक लगन हर तरहके विघ्नसभके चिरैत आगू बढि सफलतम बनौनिहार ‘मरदबा’ जीबनाथ चौधरी प्रति मैथिलीके गर्व करहिटा परत ।

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